साधना
सत्य साधना मौन ध्यान है, जो नाल और खेयादा में 10-दिवसीय केंद्र-परिसर शिविरों में सिखाया जाता है। इस साधना को समझने और शिविर के नियमों को जानने के लिए यहाँ से शुरुआत करें।

- सत्य साधना क्या है?मौन ध्यान, अपने ही अनुभव से सीखा गया, भगवान महावीर की शिक्षाओं में निहित।और पढ़ें
- शिविर कैसे चलता हैआगमन, दैनिक लय, मौन, शिविर का आचरण, आचार्य का मार्गदर्शन, और खर्च।और पढ़ें
- आपका पहला शिविरचरण-दर-चरण, साधना के बारे में पढ़ने से लेकर केंद्र पहुँचने तक।और पढ़ें
- दैनिक साधना और ऑनलाइन बैठकेंघर पर साधना, और Zoom पर दैनिक ऑनलाइन बैठकें।और पढ़ें
- प्रश्ननए साधकों के सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर।और पढ़ें
शिविर में
चरण 1 · सदाचार
सदाचार
शिविर सदाचार के संकल्प से आरंभ होता है: सत्य, अहिंसा, अचौर्य, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य के पाँच नियम, मौन में पालन किए जाते हैं। सादगी और शांति से रहना आगे की साधना के लिए मन को स्थिर करता है।
चरण 2 · श्वास का अवलोकन
श्वास दर्शन
ध्यान ऊपरी होंठ के ऊपर के स्थान पर, आती-जाती स्वाभाविक श्वास पर टिका रहता है, उसे बदले बिना। धीरे-धीरे मन शांत, सजग और एकाग्र होता है।
चरण 3 · भीतर के सत्य का दर्शन
सत्य दर्शन
स्थिर मन के साथ, साधना पूरे शरीर की संवेदनाओं और उनके बदलाव को देखने की ओर मुड़ती है, संतुलन और समता बनाए रखते हुए।
चरण 4 · सबके प्रति मैत्री
मैत्री
शिविर सभी प्राणियों के प्रति सद्भाव के साथ संपन्न होता है, एक भाव जो परिवार, काम और दैनिक जीवन में साथ लौटता है।